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तरीक़ा-ए-इंक़लाब
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बिस्मिल्लाह-हिर्रहमा-निर्रहीम (بِسْمِ اللهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ) अथार्त शुरु करता हूँ अल्लाह के नाम से दयालु और कृपाशील है. आज का मेरा मौज़ू है–मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसलम का तरीक़ा-ए-इंक़लाब | इस पर बात करने से पहले मैं आपको बता देना चाहूंगा कि इंक़लाब है क्या | इंक़लाब का अर्थ : अगरचे इंक़लाब का लफ्ज़ी मानी है–तब्दीली, और ये किसी भी क़िस्म की तब्दीली के साथ जुड़ जाता है जैसे कि इल्मी इंक़लाब, फ़ौज़ी इंक़लाब इत्यादि | इसी प्रकार तारीख़-ए-इंसानी में एक तब्दीली ऐसी आई थी जिसकी कोई मिसाल है नहीं और वो तब्दीली तब आई एक पूरी सल्तनत ने अपना मज़हब तब्दील कर लिया जब कॉन्सेन्टाइन ईसाई हो गया | इतनी बड़ी तब्दीली तारीख़-ए-इंसानी की लेकिन इसे इंक़लाब नहीं कहा गया | यानी मज़हबी तब्दीली या अक़ीदे की तब्दीली को इंक़लाब नहीं कहा गया | इंक़लाब क्या है : इंक़लाब वो है जब किसी एक निज़ाम (सियासी निज़ाम या आर्थिक निज़ाम या सामाजिक निज़ाम) में मुक़म्मल तब्दीली आए | जैसे सियासी निज़ाम का बदलना मानी मुलुकीयत ख़त्म हो जाए और जम्हूरियत आ जाए | या बरहमन का सामाजिक निज़ाम का बदलना मानी वर्णव्यवस्था की जगह और उसकी जगह बिन ऊंच-नीच और भेद...