Posts

Showing posts from May, 2021

Dua

 रसूल अल्लाह ﷺ इन कलिमात के साथ दुआ मांगते:  «अल्लाह हुम्मा इन्नी आऊज़ुबिका मिन फितनतिन्नार व अज़ाबिन्नार व मिन शर्रलग़िना वल-फक्री » ए अल्लाह मैं जहन्नुम के फ़ित्ने जहन्नुम के अज़ाब और दौलत मंदी और फ़िक़्र के शर से तेरी पनाह मांगता हूँ।

Haadis

 The Messenger of Allah (ﷺ) said: Allah, the Mighty and Sublime, said: 'Those who love each other for the sake of My Majesty shall be upon podiums of light, and they will be admired by the Prophets and the martyrs.' The prophe Allah ﷺ would supplicate with the following words:. «Allāhumma inní Aā'uzubika min fítnatin'nar wa min shārral ghinā wal-fākri» O Allah! I seek refuge in You from the trials of the Fire, and the punishment of the Fire, and from the evils of richness and poverty. The Messenger of Allah (ﷺ) said: Allah will say to the person who will have the minimum punishment in the Fire on the Day of Resurrection, 'If you had things equal to whatever is on the earth, would you ransom yourself (from the punishment) with it?' He will reply, Yes. Allah will say, 'I asked you a much easier thing than this while you were in the backbone of Adam, that is, not to worship others besides Me, but you refused and insisted to worship others besides Me.' The P...

तारों के परिभ्रमण से किस्मत जानने के बारे में ।

       लोगों में यह मान्यता भी बहुत प्रचलित है की तारों का परिभ्रमण इन्सान की किस्मत के लिए असरकारक होता है। और उसके द्रारा इन्सान की किस्मत भी निश्चित होती है।        कुछ लोग तो यह विषय में इतने ज्यादा मुलव्विस होते है की रोज पेपर (अख़बार) में छपा हुआ "आज का भविष्य" शीर्षक के तहत मेष, वृषभ , मिथुन , कर्क वगैरह से अपना भविष्य देखते है। ❇️ उपरोक्त बात के तारों का परिभ्रमण किस्मत के लिए असरकारक होता है बिलकुल बेबुनियाद है। इस्लाम इस तरह की सभी मान्यताओ से मुक्त है। शरियत में ऐसा कुछ भी नहीं है। बल्कि ऐसी मान्यता मानने वाले इन्सान को अपने ईमान की फ़िक्र करनी चाहिए और खूब तौबा करनी चाहिए।         ★ तक़दीर के बारे में हदीष में आता है की... عَنْ عَبْدِ اللَّهِ ، حَدَّثَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ الصَّادِقُ الْمَصْدُوقُ ، قَالَ :    إِنَّ أَحَدَكُمْ يُجْمَعُ خَلْقُهُ فِي بَطْنِ أُمِّهِ أَرْبَعِينَ يَوْمًا ، ثُمَّ يَكُونُ عَلَقَةً مِثْلَ ذَلِكَ ، ثُمَّ يَكُونُ مُضْغَةً مِثْلَ ذَلِكَ ، ثُمَّ يَبْ...

सफ़र महीने के बारे में एक मनघड़ंत हदीष।

     सफ़र का महिना इस्लामी केलेंडर का दुसरे नंबर का महिना है जिसमें बहुत सी मनघड़ंत और बेबुनियाद बातें जोड़ी गई है। और साथ ही सफ़र महीने के बारे में एक मनघड़ंत हदीष जो लोगों में प्रचलित हो रही है वह यह है की...      " रसुलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया की जो व्यक्ति सफ़र का महिना ख़त्म होने की खुशखबरी देगा उसे में जन्नत की खुशखबरी दूंगा।" ❇️ उपरोक्त हदीष के बारे में उलमा ने लिखा है की यह बात जो हदीष के नामी प्रचलित है मनघड़ंत और बेबुनियाद है।        सफ़र का महीना लोग नहूसत और अपशुकन का महिना समझते है ईसलिए यह महीने के बारे में रसुलुल्लाह ﷺ की ओर निस्बत करके झूठी बाते संबोधित करते है। ईसलिए रसुलुल्लाह ﷺ ने अपनी जिंदगी में ही यह बात का इन्कार करते हुए कहा की "सफ़र महीने के बारे में अपशुकन की कोई हकीकत नहीं है" (बुखारी)

जकात नमाज, रोजा आणि हज

  जकात नमाज, रोजा आणि हजसारखी धार्मिक उपासना आहे. ती अल्लाहच्या आदेशाने त्यांनाच दिली जाईल, ज्यांना देण्याचा आदेश अल्लाहने दिला आहे. तुम्ही तुमच्या इच्छेप्रमाणे कोणत्याही वेळी नमाज अदा करू शकत नाही. नमाजच्या वेळेचे आणि नमाज अदा करण्याच्या पद्धतीचे ज्ञान असणे, त्यासाठी महत्वाचे आहे. मी सकाळी ८ ते ११ रिकामा असतो, कसलेही काम नसते म्हणून मी या वेळेत दिवसभराची नमाज अदा करून घेतो, असे म्हणता येत नाही. प्रत्येक नमाज त्याच्या वेळेवरच अदा करावी लागते. तसेच नमाज अदा करण्याची माझी स्वतःची एक पद्धत आहे, असे म्हणता येते का? नाही ना. हेच रोजांच्या बाबतीतही. रमजानचे रोजे अनिवार्य आहेत. प्रत्येकांवर नाहीत, सदृढ सशक्त व्यक्तीवर मात्र अनिवार्य आहेत. वृद्ध, आजारी, प्रवासी, लहान मुले, गर्भवती, रजस्वला आणि बाळंतीण यांना रमजानच्या रोजांबाबत सूट देण्यात आली आहे. यंदा रमजान भर उन्हाळ्यात आल्याने मला ते जमणार नाहीत, मी माझ्या सवडीनुसार पावसाळ्यात किंवा हिवाळ्यात पूर्ण करेन, असे म्हणता येणार नाही. की मला दिवसभराचे निर्जलीय रोजे होत नाहीत, मी पाणी पिऊन रोजा पूर्ण करेन, असेही म्हणता येत नाही. अल्लाहने निर्धार...