Posts
Showing posts from 2021
तरीक़ा-ए-इंक़लाब
- Get link
- X
- Other Apps
बिस्मिल्लाह-हिर्रहमा-निर्रहीम (بِسْمِ اللهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ) अथार्त शुरु करता हूँ अल्लाह के नाम से दयालु और कृपाशील है. आज का मेरा मौज़ू है–मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसलम का तरीक़ा-ए-इंक़लाब | इस पर बात करने से पहले मैं आपको बता देना चाहूंगा कि इंक़लाब है क्या | इंक़लाब का अर्थ : अगरचे इंक़लाब का लफ्ज़ी मानी है–तब्दीली, और ये किसी भी क़िस्म की तब्दीली के साथ जुड़ जाता है जैसे कि इल्मी इंक़लाब, फ़ौज़ी इंक़लाब इत्यादि | इसी प्रकार तारीख़-ए-इंसानी में एक तब्दीली ऐसी आई थी जिसकी कोई मिसाल है नहीं और वो तब्दीली तब आई एक पूरी सल्तनत ने अपना मज़हब तब्दील कर लिया जब कॉन्सेन्टाइन ईसाई हो गया | इतनी बड़ी तब्दीली तारीख़-ए-इंसानी की लेकिन इसे इंक़लाब नहीं कहा गया | यानी मज़हबी तब्दीली या अक़ीदे की तब्दीली को इंक़लाब नहीं कहा गया | इंक़लाब क्या है : इंक़लाब वो है जब किसी एक निज़ाम (सियासी निज़ाम या आर्थिक निज़ाम या सामाजिक निज़ाम) में मुक़म्मल तब्दीली आए | जैसे सियासी निज़ाम का बदलना मानी मुलुकीयत ख़त्म हो जाए और जम्हूरियत आ जाए | या बरहमन का सामाजिक निज़ाम का बदलना मानी वर्णव्यवस्था की जगह और उसकी जगह बिन ऊंच-नीच और भेद...
Our Dua'a for you
- Get link
- X
- Other Apps
It is recommended that you congratulate the bride and bridegroom by reciting the du’a of Rasulullah [Sallallahu álayhi wa sallam]: بَارَكَ اللّهُ لَكَ وَبَارَكَ عَلَيكَ وَجَمَعَ بَينَكُمَا فِى خَيرٍ Barakallahu laka wa baaraka ‘alaika wa jama’a bainakuma fi khair May Allah bless you and bless your counterpart and may Allah tie your union with virtue. [Sunan Abí Dáwud, Sunan Tirmidhi, Sunan Ibn Majah and Al-Hákim] For all the Married couples out there , Our Dua'a for you ♥ Barakallahu laka wa baaraka ‘alaika wa jama’a bainakuma fi khair ♥
गुस्से के बारे इस्लामी तालीमात
- Get link
- X
- Other Apps
गुस्सा फितरते इंन्सानी है, लेकिन अगर उस पर क़ाबू न पाया जाये ताे उस के भयानक असरात सामने आ सकते है, मियां, बीवी मे जुदाई, आैलाद व वालिदैन मे दूरी,भाईयाें मे इख्तिलाफ, मुआशरे मे बिगाड, दुनया मे ज़ुल्म व बरबरियत आैर फित्ने, फसाद की जड, गुस्सा है, जब तक गुस्सा दबा हाेता है, तब तक फितना दबा हाेता है, आैर जब गुस्सा बेक़ाबू हाे जाता है ताे फितना,फसाद भी अपना मुंह खाेल देता है, अयसे माेक़े से शैतान काफी फायदा उठाता है, वह दाे फरीक़ (जमात) मे नफरत व इंतिक़ाम (बदला) की आग भडकाता है, आैर इंन्सान बिला दरेग़ एक दूसरे का खून कर बैठता है, गुस्से के बुरे असरात, इंन्सानी जिस्म आैर रूह पर भी पडते है, रगें फूल जाना, चेहरा लाल हाे जाना, सांसाें मे तैजी पैदा हाेना, गुस्सा हाेने की अलामत है, गुस्से की वजह से पेट मे मअ्दे की शिकायत, काेलिस्टराेल की ज़्यादती, आतडियाें की परेशानी, क़ुव्वते मुदाफअत (प्रतिकार शक्ती) की कमी,ब्लडप्रेशर, फालिज (लक़्वा) का खतरा, आैर दिल की बीमारियां पैदा हाेती है,इसी तरह सर, दिमाग, याद दाश्त,वगैरह मे कमजाे़री पैदा हाे जाती है,बल्के ज्यादा गुस्से से माैत का रास्ता भी हमवार हाे सकत...
दूसरे की मुसीबत पर ख़ुशी
- Get link
- X
- Other Apps
हज़रत वासिला बिन अक़्सा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु रिवायत करते है कि हुज़ूर ऐ अकरम मुहम्मद मुस्तफ़ा स्वल्लल्लाहुअलैहि व सल्लम ने इरशाद फ़रमाया: "तुम अपने भाई की किसी मुसीबत पर ख़ुशी का इज़हार न किया करो हो सकता है के अल्लाह तआला उस पर रहम फ़रमा कर उसको इस मुसीबत से निजात दे दें और तुम को मुसीबत में मुब्तला कर दें।" तिर्मिज़ी #2506
एकेश्वरत्व आहे तरी काय?
- Get link
- X
- Other Apps
'तौहीद' म्हणजे केवळ अल्लाहचे अस्तित्व मान्य करणे असा अर्थ होत नाही. जगात असा कोणताच समाज नव्हता व आजही नाही जो अल्लाहच्या अस्तित्वाचा इन्कार करतो. जगात फार पूर्वीपासून नास्तिक अस्तित्वात आहेत. रशियाचे नास्तिकत्व तर सर्वांना माहीतच आहे. पण रशियाचे नास्तिकशासक एक पंचमांश नागरिकांनासुद्धा अल्लाहच्या अस्तित्वाचा इन्कार करण्यास राजी करू शकले नाहीत. आश्चर्य म्हणजे ते गेले चाळीस-पन्नास वर्षे नास्तिकतेचा प्रचार करीत आहेत व या प्रचारासाठी शक्ती व संपत्तीचा बेछूट व्यय करीत आहेत. गंमतीची गोष्ट अशी की, मागच्या जागतिक युध्दात जेव्हा जर्मन फौजा विजयी होत रशियात शिरु लागल्या तेव्हा स्टालिनने स्वत: जनतेस आवाहन केले की, मस्जिद व चर्चमध्ये जाऊन अल्लाहची प्रार्थना करा की, त्याने आमची रक्षा करावी. याचाच अर्थ असा की, जे लोक अल्लाहच्या अस्तित्वाचा इन्कार करतात, तेच वेळ पडल्यास अल्लाहसमोर हात पसरून दयेची याचना करतात. सारांश मानव कधीही अल्लाहच्या अस्तित्वाचा इन्कार करू शकला नाही आणि करु शकणार नाही. 'तौहीद' (एकेश्वरत्व) म्हणजे एकमेव अल्लाहचीच बंदगी (उपासना) करणे असे होते. जगातील कोणताही समाज स...
इस्लाम: आधुनिक युग का निर्माता
- Get link
- X
- Other Apps
भौतिक विज्ञान 14 वीं सदी तक इस अनुवाद-कार्य का सिलसिला जारी रहा। न केवल अल-राज़ी, इब्न सीना (Avicena) और इब्न रूश्द (Averroes) इत्यादि की पुस्तकें, बल्कि गैलेन (जालीनूस), हिप्पोक्रेट्स, प्लेटो, अरस्तू, यूक्लिड्स और टॉलेमी इत्यादि की पुस्तकों का भी अरबी भाषा से लैटिन भाषा में अनुवाद किया गया। डॉक्टर गिलकिर्क ने उस समय के इतिहास पर लिखी अपनी पुस्तक में तीन सौ से अधिक अरबी पुस्तकों का लैटिन भाषा में अनुवाद होने की चर्चा की है। तमद्दुन-अरब दूसरे पश्चिमी विद्वानों ने और अधिक स्पष्ट रूप में इस ऐतिहासिक सच्चाई को स्वीकार किया है। उदाहरण के तौर पर– रॉबर्ट ब्रिफॉल्ट ने लिखा है कि यूनानियों ने सिस्टम पैदा किया, इसके आम प्रयोग का विचार दिया, नियम और सिद्धांत निर्धारित किए, लेकिन लंबे समय के अवलोकन की मेहनत और जाँच प्रयोग द्वारा खोज का काम यूनानी स्वभाव के लिए बिल्कुल अजनबी था। वैज्ञानिक प्रगति के प्रसिद्ध इतिहासकार जॉर्ज सार्टन लिखते हैं कि जिस चीज़ को हम विज्ञान कहते हैं, इसकी मूल और सबसे बड़ी कामयाबी, जो बाद की वैज्ञानिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का कारण बनी, वह व्यावहारिक जाँच-प्रयोग, अवल...
Haadis
- Get link
- X
- Other Apps
The Messenger of Allah (ﷺ) said: Allah, the Mighty and Sublime, said: 'Those who love each other for the sake of My Majesty shall be upon podiums of light, and they will be admired by the Prophets and the martyrs.' The prophe Allah ﷺ would supplicate with the following words:. «Allāhumma inní Aā'uzubika min fítnatin'nar wa min shārral ghinā wal-fākri» O Allah! I seek refuge in You from the trials of the Fire, and the punishment of the Fire, and from the evils of richness and poverty. The Messenger of Allah (ﷺ) said: Allah will say to the person who will have the minimum punishment in the Fire on the Day of Resurrection, 'If you had things equal to whatever is on the earth, would you ransom yourself (from the punishment) with it?' He will reply, Yes. Allah will say, 'I asked you a much easier thing than this while you were in the backbone of Adam, that is, not to worship others besides Me, but you refused and insisted to worship others besides Me.' The P...
तारों के परिभ्रमण से किस्मत जानने के बारे में ।
- Get link
- X
- Other Apps
लोगों में यह मान्यता भी बहुत प्रचलित है की तारों का परिभ्रमण इन्सान की किस्मत के लिए असरकारक होता है। और उसके द्रारा इन्सान की किस्मत भी निश्चित होती है। कुछ लोग तो यह विषय में इतने ज्यादा मुलव्विस होते है की रोज पेपर (अख़बार) में छपा हुआ "आज का भविष्य" शीर्षक के तहत मेष, वृषभ , मिथुन , कर्क वगैरह से अपना भविष्य देखते है। ❇️ उपरोक्त बात के तारों का परिभ्रमण किस्मत के लिए असरकारक होता है बिलकुल बेबुनियाद है। इस्लाम इस तरह की सभी मान्यताओ से मुक्त है। शरियत में ऐसा कुछ भी नहीं है। बल्कि ऐसी मान्यता मानने वाले इन्सान को अपने ईमान की फ़िक्र करनी चाहिए और खूब तौबा करनी चाहिए। ★ तक़दीर के बारे में हदीष में आता है की... عَنْ عَبْدِ اللَّهِ ، حَدَّثَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ الصَّادِقُ الْمَصْدُوقُ ، قَالَ : إِنَّ أَحَدَكُمْ يُجْمَعُ خَلْقُهُ فِي بَطْنِ أُمِّهِ أَرْبَعِينَ يَوْمًا ، ثُمَّ يَكُونُ عَلَقَةً مِثْلَ ذَلِكَ ، ثُمَّ يَكُونُ مُضْغَةً مِثْلَ ذَلِكَ ، ثُمَّ يَبْ...
सफ़र महीने के बारे में एक मनघड़ंत हदीष।
- Get link
- X
- Other Apps
सफ़र का महिना इस्लामी केलेंडर का दुसरे नंबर का महिना है जिसमें बहुत सी मनघड़ंत और बेबुनियाद बातें जोड़ी गई है। और साथ ही सफ़र महीने के बारे में एक मनघड़ंत हदीष जो लोगों में प्रचलित हो रही है वह यह है की... " रसुलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया की जो व्यक्ति सफ़र का महिना ख़त्म होने की खुशखबरी देगा उसे में जन्नत की खुशखबरी दूंगा।" ❇️ उपरोक्त हदीष के बारे में उलमा ने लिखा है की यह बात जो हदीष के नामी प्रचलित है मनघड़ंत और बेबुनियाद है। सफ़र का महीना लोग नहूसत और अपशुकन का महिना समझते है ईसलिए यह महीने के बारे में रसुलुल्लाह ﷺ की ओर निस्बत करके झूठी बाते संबोधित करते है। ईसलिए रसुलुल्लाह ﷺ ने अपनी जिंदगी में ही यह बात का इन्कार करते हुए कहा की "सफ़र महीने के बारे में अपशुकन की कोई हकीकत नहीं है" (बुखारी)
जकात नमाज, रोजा आणि हज
- Get link
- X
- Other Apps
जकात नमाज, रोजा आणि हजसारखी धार्मिक उपासना आहे. ती अल्लाहच्या आदेशाने त्यांनाच दिली जाईल, ज्यांना देण्याचा आदेश अल्लाहने दिला आहे. तुम्ही तुमच्या इच्छेप्रमाणे कोणत्याही वेळी नमाज अदा करू शकत नाही. नमाजच्या वेळेचे आणि नमाज अदा करण्याच्या पद्धतीचे ज्ञान असणे, त्यासाठी महत्वाचे आहे. मी सकाळी ८ ते ११ रिकामा असतो, कसलेही काम नसते म्हणून मी या वेळेत दिवसभराची नमाज अदा करून घेतो, असे म्हणता येत नाही. प्रत्येक नमाज त्याच्या वेळेवरच अदा करावी लागते. तसेच नमाज अदा करण्याची माझी स्वतःची एक पद्धत आहे, असे म्हणता येते का? नाही ना. हेच रोजांच्या बाबतीतही. रमजानचे रोजे अनिवार्य आहेत. प्रत्येकांवर नाहीत, सदृढ सशक्त व्यक्तीवर मात्र अनिवार्य आहेत. वृद्ध, आजारी, प्रवासी, लहान मुले, गर्भवती, रजस्वला आणि बाळंतीण यांना रमजानच्या रोजांबाबत सूट देण्यात आली आहे. यंदा रमजान भर उन्हाळ्यात आल्याने मला ते जमणार नाहीत, मी माझ्या सवडीनुसार पावसाळ्यात किंवा हिवाळ्यात पूर्ण करेन, असे म्हणता येणार नाही. की मला दिवसभराचे निर्जलीय रोजे होत नाहीत, मी पाणी पिऊन रोजा पूर्ण करेन, असेही म्हणता येत नाही. अल्लाहने निर्धार...
Meraaj Ki Raat.........
- Get link
- X
- Other Apps
Huzur Nabi Kareem ﷺ ne farmaya ki: Meraaj ki raat mera guzar kuchh aise logo ke paas se hua jin ke naakhun taambe ke the aur woh un se apna munh aur sina noch rahe the. Main ne puchha, Jibreel! Ye kaun log hain? Unhone kaha: Ye woh hain jo logo ka gosht khaate (Yani gibat karte) aur unki be-izzati karte the. 📒Abu Dawood | Hadees No.4878
हदीष
- Get link
- X
- Other Apps
आप (स,अ,व) ने फरमाया: " सारी उम्मत जन्नत में दाखिल होगी सिवाये उनके जिन्होंने इन्कार किया, फिर आपने फरमाया: जो मेरी इताअत करेगा वो जन्नत में दाखिल होगा ओर जो मेरी ना-फरमानी करेगा वो इन्कार करने वालों में होगा " [सहीह बुखारी:7280] आप (स,अ,व) ने फरमाया: " इस्लाम की बुनियाद 5 चीज़ो पर हें. 1)सिर्फ 1 अल्लाह की इबादत करना,उसके अलावा हर किसी की इबादत से इन्कार करना, 2)नमाज़ पढना, 3)जकात देना, 4)हज्ज करना, 5)रमजान के रोजे रखना. " [सहीह मुस्लिम:112] आप (स,अ,व) ने फरमा " खालिस मुनाफिक की 4 आदतें हे. 1)जब बात करे तो जूठ बोले. 2)जब मुआहदह करे तो तोड डाले. 3)जब वादा करे तो वादा-खिलाफी करे. 4)जब लडाई-जगडा करे तो गाली दे. " [सहीह मुस्लिम:210] आप (स,अ,व) ने फरमा " 7 तबाह करने वाले गुनाहों से बचो. 1)अल्लह के साथ शिर्क करना, 2)जादु, 3)ना-हक कत्ल करना, 4)यतीम का माल खाना, 5)सूद(व्याज) खाना, 6)लडाई के वकत पीठ दिखा कर भाग जाना, 7)पाक दामन मोमिन औरतों पर तोहमत लगाना. " [सहीह मुस्लिम:262] आप (स,अ,व) ने फरमा " कामिलो मुकम्मल ईमान वाले वह लोग हैं जिनके अखलाक सबसे ...
When you visit the sick.
- Get link
- X
- Other Apps
Umm Salamah (may Allah be pleased with her) narrated: "The Messenger of Allah (peace and blessings of Allah be upon him) said to us: 'When you attend to the sick or dying then say only good, for indeed the angels say "Amin" to what you say.'" She said: "When Abu Salamah died I went to the Prophet (SAW) and said: 'O Messenger of Allah! Abu Salamah has died.' He said: 'Then say: "O Allah forgive me and him, and give me a good replacement for him." She said: "I said that, and Allah gave a replace that was better than him: The Messenger of Allah (SAW)." (Jami` at-Tirmidhi 977, Book 10, Hadith 13) When you visit the sick, always say good things. The encouragement should lift their hearts and what you say should not make them feel worse. Make dua for them and hope for their duas too. Take care of one another because we will all need each other’s duas to make it to Jannah.
"SAVE YOURSELF FROM YOU TONGUE."
- Get link
- X
- Other Apps
فَلْيَضْحَكُواْ قَلِيلاً وَلْيَبْكُواْ كَثِيراً جَزَاء بِمَا كَانُواْ يَكْسِبُونَ Quran 9:82 So let them laugh little and weep much, in recompense for what they have been earning. THE QURAN INFORMS US THAT GOD WILL JUDGE US FOR OUR DEEDS, WE WILL BE ACCOUNTABLE TO GOD ON THE DAY OF JUDGEMENT AND OUR END WILL BE IN PARADISE OR HELL. PARADISE IS A PLACE FOR THOSE WHO ARE VERY SINCERE, SERIOUS, SPEAK LESS AND RESPECT OTHERS. WHEN THEY SPEAK, THEY REMEMBER THEY HAVE TO BE ANSWERABLE TO GOD. "SAVE YOURSELF FROM YOU TONGUE." SPEAKING TOO MUCH IS ALSO WASTAGE OF THE TONGUE. "ONE WHO REMAINS SILENT FINDS SALVATION." "ONE WHO BELIEVES IN GOD AND THE DAY OF JUDGMENT, HE SHOULD EITHER SPEAK A GOOD WORD OR REMAIN SILENT." Short Video
कुरआनने जगाला काय दिले?
- Get link
- X
- Other Apps
इस्लामी कॅलेंडरचा ९ महिना असणाऱ्या रमजानचे महत्व अनन्यसाधारण आहे. हा कुरआन अवतरणाचा महिना. कुरआन इस्लाम धर्म, संस्कृती आणि परंपरांचा आधार. मानवी इतिहासात या सारखा दुसरा ग्रंथ आढळत नाही. या ग्रंथाने एका नव्या युगाला, नवसभ्यतेला, नवसंस्कृतीला जन्म दिला. या ग्रंथाने मानवी जीवनाचा प्रवाह बदलला. या ग्रंथाने मानवाला मानवाच्या गुलामीतून मुक्त केले. काळ्यांना गोऱ्यांच्या गुलामीतून मुक्त केले. स्त्रीला पुरुषाच्या गुलामीतून मुक्त केले. प्रजेला शासकाच्या गुलामीतून मुक्त केले. गुलामांना मालकांच्या गुलामीतून मुक्त केले. या ग्रंथाने धर्माची परिभाषा बदलून टाकली. निर्माता आणि निर्मितीच्या दरम्यान असणारी पुरोहित संस्था नष्ट केली. मानवाला त्याच्या पालनकर्त्याशी जोडले. धर्मग्रंथ सर्वांसाठी उघडी केली. प्रार्थना स्थळे सर्वांसाठी उघडली. धर्म शिक्षण सर्वांसाठी खुले केले. धर्मज्ञानाचा अभ्यासक आणि पंडित होण्याची सर्वांना समान संधी दिली. या ग्रंथाने समानतेचे व्यवहारिक प्रात्यक्षिक करून दाखवले. काळे गोरे समान केले. स्त्री पुरुष समान केले. मालक गुलाम समान केले. शासक प्रजा समान केली. नमाजसाठी शासकाला आणि का...
आसमान में एक से ज्यादा सूरज के द्रश्य के बारे में ।
- Get link
- X
- Other Apps
कुछ मरतबा आसमान में अदभुत द्रश्य देखने मिलते है की आसमान में एक साथ दो या तीन सूरज हो ऐसा लगता है। वर्तमान में चीन और सूदान जैसे देशो में भी ये द्रश्य देखने मिले है। मुद्दे की बात यह है की जब भी ऐसे अदभुत द्रश्य देखने मिलते है तब लोग उसकी वीडियो निम्न बातों के साथ शेयर करते है। ❖ अब क़यामत बहुत ही करीब है। ❖ आसमान में एक साथ दो-तीन सूरज का दिखना कयामत की सबसे बड़ी निशानी है। ❖ अब तौबा के दरवाजे बंद हो जाएँगे। ❇️ सबसे पहली बात की आसमान में दो-तीन सूरज के द्रश्य के बारे में वैज्ञानिक और खगोलविदों का कहना हैं की यह द्रश्य अपनी आँखों का धोखा होता है। जिसे सामान्य परिभाषा में "सन डॉग" (Sun dog) कहते है। जो सूरज के आसपास बने हुए प्रकाश के गोलाकार होते है। हकीकत में ऐसा कुछ भी होता नहीं है। और रही बात की एक से ज्यादा सूरज का दिखना कयामत की निशानी है तो यह बात बेबुनियाद, मनघड़ंत और बिल्कुल गलत है। क्यूंकि हदीष में सूरज का पश्चिम में तुलुअ होना क़यामत की निशानी बताई है। न की एक से ज्यादा सूरज का दिखना। حَدَّثَنَا أَبُو...
Hadees
- Get link
- X
- Other Apps
Allah Ta'ala banda ki tauba saans ukhadne se pehle tak qubool karta hai. (Tirmizi: 3537) AAP(S.A.W) NE FARMAYA: " TUM QYAMAT KE DIN ALLAH KE YAHA US SHAKHSH KO SAB SE BURA PAVOGE JO KUCH LOGO KE SAMNE 1 MUNH SE BAT KARTA HE AUR DUSRO KE SAMNE DUSRE MUNH SE(ISE KUCH KAHA AUR USE KUCH DUSRA)" [SAHIH BUKHARI:6058] Yaqeenan Allah tumhein hukm deta hai ke tum amaanatein un ke haqadaaron tak pohnchaao. Sura-e-Nisa: 58 AAP(S.A.W) NE FARMAYA: " BAD-GUMANI SE BACHTE RAHO,IS LIYE KE BAD-GUMANI KI BATE AKSAR JUTHI HOTI HE,AUR LOGO KE AAIB TALASH KARNE SE BHI BACHO AUR HASAD MAT KARO,SAB ALLAH KE BANDE HEN BHAI-BHAI BAN KAR RAHO" [SAHIH BUKHARI:6064] Tum sab mein mujhe ziyaada muhabbat us shakhs se hai, jis ke akhlaaq ziyaada achchhe hain. Bukhari: 3759 Ilme Deen ka haasil karna har musalmaan par farz hai. (Ibne Maaja : 224) AAP(S.A.W) NE FARMAYA: " PAHELVAN VO NAHI HE JO KUSHTI LADNE ME GALIB AAJAYE, BALKE ASLI PAHELVAN VO HE JO GUSSE KI HALAT ME APNE PAR QABU PA LE...